रविवार, 14 फ़रवरी 2010

कराहता हिन्दुस्तान

14 फरवरी 2010
26/11 के बाद छाई खामोशी मन में ये सवाल पैदा कर रही थी कि क्या हिन्दुस्तान को बार बार अपने नापाक इरादों से दहलाने वाले दहशतगर्द शांत हो गए हैं...क्या हिन्दुस्तान की सरकार का सख्त रुख इस बार उनके इरादों को डिगाने में कामयाब हो गया है...क्या अब अमन के इस देश की आबो-हवा में आतंक के बारुद की गंध नहीं आएगी...क्या अब लोग बेखौफ होकर अपने देश में रह सकेंगे...इन सारे सवालों का जवाब 13 फरवरी की शाम पुणे में हुए धमाकों के बाद ही मुझे हासिल हो गया...एक बार फिर आतंक से निपटने के भारत के तल्ख लहजे को मजाक में उड़ा दिया गया...यानि आतंक के आकाओं को ये पूरा भान है कि भारत सिर्फ घुड़की दे सकता है..कर कुछ नहीं सकता...कुछ हद तक ये सही भी लगता है क्योंकि अगर वो कुछ कर सकता तो शायद पुणे की बेकरी में खून के छींटे और मांस के लोथड़े देखने को ना मिलते...मै नहीं जानता राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भारत की क्या मजबूरी है जो उसे आतंक और आतंक के सरपरस्तों से निपटने में हिचकिचाहट होती है...मैं नहीं जानता कि क्यों हर बार दहशतगर्दों को मुंहतोड़ जवाब देने की हुंकार वक्त के साथ साथ गर्द और गुबार में खो जाती है...क्यों हम अपनी गलतियों से सबक नहीं लेते और मासूमों की जान का सौदा कर बैठते हैं...मैं नहीं जानता लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि हर बार सियासत की कमजोरी की कीमत एक आम हिन्दुस्तानी को चुकानी पड़ती है...इसकी गवाह है...भारत की सरजमीं पर उसी के बाशिंदों के खून से लाल हुई और अब इतिहास बन चुकी दहशत की ये इबारतें...

( आंकड़े बीबीसी हिन्दी के सौजन्य से...)

पुणे, फ़रवरी 13, 2010: पुणे में जर्मन बेकरी में हुए धमाके में पाँच महिलाओं और कुछ विदेशियों समेत नौ लोग मारे गए और 45 घायल हुए.

मुंबई, नवंबर 26, 2008: मुंबई में तीन जगहों - ताज और ऑबराय होटलों और विकटोरिया टर्मिनस पर हुए चरमपंथी हमले तीन दिन तक चले और इनमें लगभग 170 लोग मारे गए जबकि 200 अन्य घायल हो गए.

असम, अक्तूबर 30, 2008: असम में एक साथ 18 जगहों पर हुए बम धमाकों में 70 से अधिक लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल हो गए.

इंफ़ाल, अक्तूबर 21, 2008: मणिपुर पुलिस कमांडो परिसर पर हुए हमले में 17 लोग मारे गए.

मालेगांव, सितंबर 29, 2008: महाराष्ट्र के मालेगांव में एक वाहन में बम धमाके के कारण पाँच लोग मारे गए.

मोदासा, सितंबर 29, 2008: गुजरात के मोदासा में एक मस्जिद के पास हुए धमाके में एक व्यक्ति मारा गया.

दिल्ली, सितंबर 27, 2008: दिल्ली में महरौली के बाज़ार में फेंके गए एक देसी बम हमले में तीन लोग मारे गए.

दिल्ली, सितंबर 13, 2008: दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर हुए बम धमाकों में कम के कम 26 लोग मारे गए और अनेक घायल हुए.


अहमदाबाद, जुलाई 26, 2008: दो घंटे के भीतर 20 बम विस्फोट होने से 50 से अधिक लोग मारे गए.

बंग्लौर, जुलाई 25, 2008: एक छोटे बम धमाके में एक व्यक्ति मारा गया.

जयपुर, मई 13, 2008: शहर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 68 लोग मारे गए और अनेक घायल हुए.

रामपुर, जनवरी 1, 2008: उत्तर प्रदेश के रामपुर में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के कैंप पर हुए हमले में आठ लोग मारे गए.

लखनऊ, फ़ैज़ाबाद, वाराणसी, नवंबर 23, 2007: उत्तर प्रदेश के तीन शहरों में हुए धमाकों में 13 मारे गए कई घायल हुए.
अजमेर, अक्तूबर 11, 2007: राजस्थान के अजमेर शरीफ़ में हुए धमाके में दो मारे गए और अनेक घायल हुए.

हैदराबाद, अगस्त 25, 2007: आंध्र प्रदेश के हैदराबाद में हुए धमाके में 35 मारे गए और कई घायल हुए.

हैदराबाद, मई 18, 2007: हैदराबाद में मक्का मस्जिद धमाके में 13 लोग मारे गए.

समझौता एक्सप्रेस, फ़रवरी 19, 2007: भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में हरियाणा में धमाके, 66 यात्री मारे गए.

मालेगांव, सितंबर 8, 2006: महाराष्ट्र के मालेगांव में तीन धमाकों में 32 लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल हुए.

मुंबई, जुलाई 11, 2006: मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 170 लोग मारे गए और 200 घायल हो गए.

2 टिप्‍पणियां:

अनाम ने कहा…

सही कहा आपने...जब तक सशक्त तरीके से कोई कड़ा कदम नहीं उठाया जाएगा...भारत की चेतावनियों को यूं ही हल्के में लेकर आतंकी खून खराबा करते रहेंगे...
आकंड़े देने के लिए शुक्रिया...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

सरकार को तुरन्त साध्वी प्रज्ञा सिंह की जांच करानी चाहिये. और कड़ी कार्रवाई की घोषणा कर तो दी है.

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