बुधवार, 25 मार्च 2009

और प्यार क्या और प्यार कहां...


25 मार्च 09
यूं तो प्यार पर इतना कुछ लिखा जा चुका है कि कहने को शायद ही कुछ शेष बचा हो...लेकिन हर बार जब इस विषय पर कुछ लिखा जाता है तो वो नया ही लगता है...ढाई अक्षर के इस शब्द की महिमा ही ऐसी है...इसीलिए मैं आज फिर इस प्यार को परिभाषित करने बैठ गया हूं कि प्यार आखिर क्या है...

लरजते आंसुओं की कहानी है मुहब्बत
बरसती आंखों की जुबानी है मुहब्बत
पास रह के भी दूर रहती है बहुत
महकते फूलों की रातरानी है मुहब्बत


मुहब्बत एक रात है भीगी-भीगी, जिसमें एक उम्र सपनों में गुजर जाती है...मुहब्बत एक रतजगा है, जो आंखों में मीठी नींद बनकर बसा करती है...मुहब्बत हथेली पर रोपा हुआ वो बीज है...जो तमाम उम्र हथेलियों पर रजनीगंधा के फूल की तरह खिली रहती है, कभी शर्म बनकर चेहरे पर छा जाती हैं ये हथेलियां...तो कभी भरापूरा प्यार बनकर किसी के माथे को सहलाती हैं...मुहब्बत मुमताज का वो प्यारा प्रस्ताव भी था, जो उसके प्रियतम के लिए खता बन गया...मुहब्बत वो जुदाई भी है...जो सलीम-अनारकली के बीच एक फासला बनकर खड़ी हो गई...मुहब्बत जो हीर की आंखों में थी...मुहब्बत जो लैला की अदाओं में थी...मुहब्बत जो सोहनी के होठों पर थी, मुहब्बत जो शीरी की सदाओं में थी...यहीं है मुहब्बत का फलसफा...यही है मुहब्बत का तरन्नुम...उस जन्म से इस जन्म तक...उस पार से इस पार तक...शहर से गांव तक...जमीं से आसमां तक और प्यार क्या और प्यार कहां....

6 टिप्‍पणियां:

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

लरजते आंसुओं की कहानी है मुहब्बत
बरसती आंखों की जुबानी है मुहब्बत
पास रह के भी दूर रहती है बहुत
महकते फूलों की रातरानी है मुहब्बत
बेहद खूबसूरत लिखा है

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सही कहा ... ढाई अक्षर के इस शब्द की महिमा ही ऐसी है ... अच्‍छा आलेख लिख डाला ... बधाई।

श्यामल सुमन ने कहा…

तेरी आँखों में गर कोई मेरी तस्वीर बन जाये।
मेरी कविता भी जीने की नयी तदबीर बन जाये।
बड़ी मुश्किल से पाता है कोई दुनियाँ में अपनापन,
बना लो तुम अगर अपना मेरी तकदीर बन जाये।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

अनिल कान्त ने कहा…

ये मोहब्बत भी बड़ी अजीब चीज़ होती है ....


मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

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